Episode's summary
कुछ लोग डर फैलाते हैं। कुछ लोग डर बेचते हैं। और कुछ…डर को सुनते हैं।” “और जो डर सुनने लगे…उसे रोकना पड़ता है।”
कुछ लोग डर फैलाते हैं। कुछ लोग डर बेचते हैं। और कुछ…डर को सुनते हैं।” “और जो डर सुनने लगे…उसे रोकना पड़ता है।”
Episodes
बोपुल बागची - खामोशी का शोर....
Listenedकुछ लोग डर फैलाते हैं। कुछ लोग डर बेचते हैं। और कुछ…डर को सुनते हैं।” “और जो डर सुनने लगे…उसे रोकना पड़ता है।”
बोपुल बागची - डर की सूची!
Listenedआपका एक डर आपको डराता है, अगर डर की एक सूची होगी तो क्या होगा?
बोपुल बागची - पंचम पूर्णिमा
Listenedरीमा की गूंजती आवाज़ "अब आखिरी चक्र है, बोपुल। अब तुम खुद चल कर आए हो। बलि पूरी होगी।" बोपुल (आगे बढ़ता है): "नहीं रीमा, बलि नहीं... सच्चाई पूरी होगी।"
बोपुल बागची - चौथी छाया
Listenedबोपुल (धीरे-धीरे बुदबुदाते हुए): "तीन शव, एक जैसे चिह्न, कुछ कुछ अलग से! और चौथी बलि वो, जिसने मुझे केस की शुरुआत में ही सही सुराग दिए? इतनी सफाई से जाल कौन बुन सकता है?"
बोपुल बागची - काला धागा!
Listenedरितु: "हाथ में बंधा ये काला धागा… बिल्कुल आम नहीं है। इसमें मुरमुरे और नींबू की गांठें बंधी हैं।" बोपुल: "ये तांत्रिक विधि का हिस्सा है — ‘शव-साधना’। शव की ऊर्जा को कैद करने के लिए ये टोटका होता है। लेकिन सवाल ये है कि किसने की?"