Episode's summary
रमा ने बड़े संकोच के साथ कहा, ‘विश्वास मानिए, मैं बिलकुल खाली हाथ हूँ। मैं तो आपसे रुपये माँगने आया था। मुझे बड़ी सख्त जरूरत है। वह रुपये मुझे दे दीजिए, मैं आपके लिए कोई अच्छा-सा हार यहीं से ला दूँगा। मुझे विश्वास है, ऐसा हार सात-आठ सौ में मिल जाएगा।’”
रमा ने बड़े संकोच के साथ कहा, ‘विश्वास मानिए, मैं बिलकुल खाली हाथ हूँ। मैं तो आपसे रुपये माँगने आया था। मुझे बड़ी सख्त जरूरत है। वह रुपये मुझे दे दीजिए, मैं आपके लिए कोई अच्छा-सा हार यहीं से ला दूँगा। मुझे विश्वास है, ऐसा हार सात-आठ सौ में मिल जाएगा।’”
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गबन (पार्ट ११ ) by Surbhi Kansal
Listenedरमा ने बड़े संकोच के साथ कहा, ‘विश्वास मानिए, मैं बिलकुल खाली हाथ हूँ। मैं तो आपसे रुपये माँगने आया था। मुझे बड़ी सख्त जरूरत है। वह रुपये मुझे दे दीजिए, मैं आपके लिए कोई अच्छा-सा हार यहीं से ला दूँगा। मुझे विश्वास है, ऐसा हार सात-आठ सौ में मिल जाएगा।’”
गबन (पार्ट १०) by Surbhi Kansal
ListenedFor msg plz follow on Instagram https://www.instagram.com/surbhi.kansal.81/profilecard/?igsh=MWZweDhybnlibDBxbw== https://www.instagram.com/surbhi.kansal.81/profilecard/?igsh=MWZweDhybnlibDBxbw== रमा सारी दुनिया के सामने जलील बन सकता था, किन्तु पिता के सामने जलील बनना उसके लिए मौत से कम न था। जिस आदमी ने अपने जीवन में कभी हराम का एक पैसा न छुआ हो, जिसे किसी से उधार लेकर भोजन करने के बदले भूखों सो रहना मंजूर हो, उसका लड़का इतना बेशर्म और बेगैरत हो! रमा पिता की आत्मा का यह घोर अपमान न कर सकता था।
गबन ( पार्ट ९) by Surbhi Kansal
ListenedFor msg plz follow on Instagram https://www.instagram.com/surbhi.kansal.81/profilecard/?igsh=MWZweDhybnlibDBxbw== https://www.instagram.com/surbhi.kansal.81/profilecard/?igsh=MWZweDhybnlibDBxbw== रमा इतना निस्तेज हो गया कि जालपा पर बिगड़ने की भी शक्ति उसमें न रही। रूआंसा होकर नीचे चला गया और स्थित पर विचार करने लगा। जालपा पर बिगड़ना अन्याय था। जब रमा ने साफ कह दिया कि ये रूपये रतन के हैं, और इसका संकेत तक न किया कि मुझसे पूछे बगैर रतन को रूपये मत देना, तो जालपा का कोई अपराध नहीं। उसने सोचा,इस समय झिल्लाने और बिगड़ने से समस्या हल न होगी। शांत होकर विचार करने की आवश्यकता थी। रतन से रूपये वापस लेना अनिवार्य था।
गबन ( पार्ट ८) by Surbhi Kansal
ListenedFor msg plz follow on Instagram https://www.instagram.com/surbhi.kansal.81/profilecard/?igsh=MWZweDhybnlibDBxbw== https://www.instagram.com/surbhi.kansal.81/profilecard/?igsh=MWZweDhybnlibDBxbw== रमा दिल में कांप रहा था, कहीं जालपा यह प्रश्न न कर बैठे। आकर उसने यह प्रश्न पूछ ही लिया। उस वक्त भी यदि रमा ने साहस करके सच्ची बात स्वीकार कर ली होती तो शायद उसके संकटों का अंत हो जाता।
गबन ( पार्ट ७) by Surbhi Kansal
ListenedFor msg plz follow on Instagram https://www.instagram.com/surbhi.kansal.81/profilecard/?igsh=MWZweDhybnlibDBxbw== https://www.instagram.com/surbhi.kansal.81/profilecard/?igsh=MWZweDhybnlibDBxbw== दस ही पांच दिन में जालपा ने नए महिला-समाज में अपना रंग जमा लिया। उसने इस समाज में इस तरह प्रवेश किया, जैसे कोई कुशल वक्ता पहली बार परिषद के मंच पर आता है। विद्वान लोग उसकी उपेक्षा करने की इच्छा होने पर भी उसकी प्रतीभा के सामने सिर झुका देते हैं।